Friday, December 19, 2014

माता-पिता पर एक बेहतरीन रचना - द्वारा - परम पूज्य राष्ट्र संत श्री मोरारी बापू जी



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जिसकी कोख से जन्म होता : वह माँ
जिसके पेट पर खेलने में मजा आता:वह पिता

जो धारण करती : वह माँ
जो सिंचन करता : वह पिता !

जो गोद में लेकर सहलाती : वह माँ
जो हाथों में धरकर ऊंचा उठाता:वह पिता!

जो उंगली पकड़कर चलना सिखाती:वह माँ
जो कंधों पर लेकर दौड़ना सिखाता:वह पिता

जो डूब-डूब गगरी करती: वह माँ
जो हर-हर गंगे करता : वह पिता !

जो आँचल तले दबाती: वह माँ
जो पिंजड़े से बाहर निकालता :वह पिता!

जो व्याकुल होती : वह माँ
जो संयम सिखाता : वह पिता !

जो आशीर्वचन जैसी: वह माँ
जो नमस्कार तुल्य : वह पिता !

जिसके सिवा जीवन नहीं : वह माँ
जिसके सिवा भविष्य नहीं: वह पिता !!
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प्रेषक - हितेश जोशी जी

Friday, November 7, 2014

क्या है सफलता - एक चर्चा

लेखिका - नीना दयाल

(नीना दयाल एक लाइसेंस्ड लाइफ़ सक्सेस सलाहकार, बिजनेस और पर्सनल कोच, कैपेबिलिटी बिल्डिंग एक्सपर्ट, मेंटल रेसिलिएंस* स्पेशलिस्ट, मैनेजमेंट कन्सल्टेंट और लेखिका हैं। आप सीक्रेट पुस्तक व फिल्म में दिखाये गये और मानवीय क्षमता को बढ़ाने में माहिर श्री बॉब प्रॉक्टर से प्रशिक्षित हैं।



आप लम्बे समय से बहुत सी राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियों के लिये प्रशिक्षण दे रही हैं।

नीना जी की कम्पनी सक्सेस सिनर्जी इंटरप्राइजेज कॉर्पोरेट और पब्लिक श्रोताओं के लिये हर वर्ष बहुत से इवेंट्स करती है।

नीना जी के डी परिवार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और के डी परिवार में अपने ज्ञान व अनुभव को साधारण जन के साथ शेयर कर रही हैं। इस लेख को भेजने के लिए के डी परिवार नीना जी का हार्दिक धन्यवाद करता है।

इस लेख के माध्यम से नीना जी आपको आमंत्रित कर रही हैं, सफलता के आपके मानक आदर्शों पर चर्चा करने के लिये। इस चर्चा में शामिल हों और अपनी सफलता की दिशा में ठोस कदमों के साथ आगे बढ़ें।)



क्या है सफलता - एक चर्चा

अपने मान्य आदर्शों की ओर प्रगतिशील रहना ही "सफलता" है।
अर्ल नाईटएंगल

आइये इस पर चर्चा करें -



सफलता की व्याख्याओं में ऊपर दी गई व्याख्या सबसे अधिक संतुष्टि देने वाली मानी जाती है, जो प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होती है। अर्ल ने 1959 में 17 वर्षों के अपने गहन शोध के बाद यह व्याख्या दी। पूरी दुनिया में बहुत से माहिर लोग आज भी सफलता का विवरण देते समय इस व्याख्या का उपयोग करते हैं।

साधारण तर्क यही कहता है कि किसी चीज़ के होने से पहले आपका उसको जानना जरूरी है।

इसलिये मान्य आदर्श की ओर प्रगतिशील होने से पहले आपको ये जानना जरूरी है कि "आपका मान्य आदर्श आखिर' है क्या?"

आप सभी मित्रों से निवेदन है कि कृपया इस चर्चा में भाग लें और बतायें कि आपका सफलता का मान्य आदर्श क्या है?

अनुवादक - विपिन कुमार शर्मा

Thursday, November 6, 2014

सफलता का ज्ञान





आजकल सफलता शब्द बहुत ज्यादा सुनाई देता है। संसार बहुत ज्यादा कम्पीटीटिव हो गया है।

मनुष्य जीवन में प्रतियोगिताएं छोटी उम्र में ही शुरू हो जाती हैं। मैंने कहीं पढ़ा था कि एक बच्चा जब अपने पैर का अंगूठा मुंह में लेने का प्रयास करता है, वहीं से आरम्भ होता है सारा जीवन चलने वाला उसका अंतहीन संघर्ष।

अब अगर जीवन में संघर्ष है, प्रतियोगिताएं हैं और चारों तरफ कम्पीटीशन है तो विजय यानि सफलता के प्रति मनुष्य की उत्सुकता स्वाभाविक ही है।

इसी सफलता की चाह में मनुष्य गुरु और ज्ञान की तलाश करता है।

सफलता के अनेकानेक गुरुओं का ज्ञान आज सहज ही उपलब्ध है। आज बहुत सारी पुस्तकें केवल "सफलता" विषय पर ही प्रकाशित हो रही हैं। कागज़ की पुस्तकों के अलावा ई-बुक्स और ऑडियो बुक्स के रूप में इंटरनैट पर सहज ही उपलब्ध है। इंटरनैट पर बहुत सा ज्ञान तो नि:शुल्क उपलब्ध है। जिसे आप अपने कम्प्यूटर या मोबाईल पर कुछ ही सैकेंड्स में डाउनलोड कर सकते हैं।

बुक बून एक इसी तरह की वैब साईट है। इस साईट से आप अपने काम की बहुत सी पुस्तकें बिल्कुल फ्री डाउनलोड कर सकते हैं।


सफलता के ज्ञान की पहचान कैसे करें?

सफलता का यह ज्ञान दो तरह का है। एक ज्ञान तो केवल साहित्यिक है। यह उपदेश के रूप में है जो सफलता हेतू दर्शन ज्ञान प्रदान करता है। सफलता की इच्छा रखने वाले के लिये ये ज्ञान काम का है।

लेकिन सफलता के लिये केवल साहित्यिक ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान की भी आवश्यकता है।

सफलता का ये व्यवहारिक ज्ञान आसानी से उपलब्ध नहीं है।

ये ज्ञान या तो किसी मेंटर से मिल सकता है या पूर्व में सफलता हासिल कर चुके किसी अनुभवी व्यक्ति से।

निश्चित ही सफलता का ये व्यवहारिक ज्ञान पुस्तकों में भी है, परन्तु ये किन पुस्तकों में हैं यह ज्ञान भी किसी मेंटर या अनुभवी व्यक्ति से ही मिल पायेगा।

अगर आप सफलता की तलाश में हैं और इसके लिये मेंटर या अनुभवी लोगों की मदद लेना चाहते हैं तो के डी परिवार में आपका स्वागत है।

के डी परिवार में बहुत से राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक और के डी परिवार से ज्ञान हासिल कर रहे अनुभवी सफल लोग आपका मार्गदर्शन करने के लिये प्रस्तुत हैं।

चाहे आप विद्यार्थी हों या शिक्षक, चाहे नौकरीपेशा हों या व्यवसायी, चाहे गृहणी हों या कामकाजी महिला, चाहे विवाहित हों या अविवाहित; के डी परिवार में आपको अपनी सफलता के लिये व्यवहारिक ज्ञान व मार्गदर्शन ज़रूर मिलेगा।

के डी परिवार से सम्पर्क करने के लिये अभी kdparivar@gmail.com पर अभी मेल भेजें।

Sunday, October 19, 2014

के डी परिवार का "सफलता का ज्ञान-अनुसन्धान यज्ञ"


आओ मिलकर सफलता के व्यावहारिक कोर्स की रचना करें।

आप सब आमंत्रित हैं के डी परिवार के अभूतपूर्व "सफलता के ज्ञान-अनुसन्धान यज्ञ" में।

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है कि ये यज्ञ सफलता के ज्ञान के लिए होगा।

के डी परिवार में हम चाहते हैं कि सम्पूर्ण मानव जाती के लिए और भावी पीढ़ी के लिए कल्याणकारी व्यवहारिक शिक्षा व ज्ञान का एकत्रिकरण किया जाये।

आप भी सादर आमंत्रित हैं।

इस ज्ञान-यज्ञ में हम सभी लोग अपने-अपने ज्ञान की आहुति डालेंगे।

यह ज्ञान अनुभवजन्य हो तो अति उत्तम।

अन्यथा इस ज्ञान का अनुसन्धान किया जाए। के डी परिवार की मदद से सफलता सम्बन्धी ज्ञान हासिल करें और ज्ञान को व्यवहार में लाने का हवन करें। सफल अनुभव की पूर्णाहुती के पश्चात इस ज्ञान रूपी प्रसाद को जन-जन में वितरित करें।

आईये, सफलता के लिए आवश्यक समस्त ज्ञान को एक ही जगह इकट्ठा करें।

अपने विचारों से इस "सफलता के ज्ञान अनुसन्धान यज्ञ" को सफल बनायें।

बताइये कि एक व्यक्ति को किस उम्र में किस तरह का ज्ञान मिलना चाहिए जिसे पा कर वह सफल, सुखी और समृद्ध हो सके।

यह भी बताइये कि एक व्यक्ति को सफल होने के लिए स्कूली शिक्षा के अलावा किस तरह के ज्ञान की आवश्यकता होगी।

अगर आपके पास सफलता के लिए आवश्यक ज्ञान है तो उसे यहाँ शेयर करें, ताकि वो अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचे।

अगर आपको जानकारी है कि सफलता के लिए किस तरह के ज्ञान की आवश्यकता है, तो अपनी जानकारी यहाँ शेयर करें, ताकि हम उस ज्ञान को यहाँ शामिल करें।

अगर आपको अपनी सफलता के लिए किसी विशेष ज्ञान की आवश्यकता है तो हमें बताइये। हम वो ज्ञान आपके लिए यहाँ के डी परिवार में उपलब्ध करवायेंगे।

हमें उम्मीद ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आप हमेशा की तरह हमारे इस प्रयास को भी पसंद करेंगे और "सफलता के इस ज्ञान-अनुसन्धान यज्ञ" को सफल बनाने हेतू अपना सहयोग अवश्य डालेंगे।

Thursday, October 16, 2014

एक प्रेरणास्पद कहानी : पुल


बटाला से के डी परिवार की माननीय सदस्या गुरजीत कौर जी को धन्यवाद सहित
दो भाई साथ साथ खेती करते थे। मशीनों की भागीदारी और चीजों का व्यवसाय किया करते थे। चालीस साल के साथ के बाद एक छोटी सी ग़लतफहमी की वजह से उनमें पहली बार झगड़ा हो गया था झगड़ा दुश्मनी में बदल गया था।
एक सुबह एक बढ़ई बड़े भाई से काम मांगने आया. बड़े भाई ने कहा “हाँ ,मेरे पास तुम्हारे लिए काम हैं। उस तरफ देखो, वो मेरा पडोसी है, यूँ तो वो मेरा भाई है, पिछले हफ्ते तक हमारे खेतों के बीच घास का मैदान हुआ करता था पर मेरा भाई बुलडोजर ले आया और अब हमारे खेतों के बीच ये खाई खोद दी, जरुर उसने मुझे परेशान करने के लिए ये सब किया है अब मुझे उसे मजा चखाना है, तुम खेत के चारों तरफ बाड़ बना दो ताकि मुझे उसकी शक्ल भी ना देखनी पड़े."
“ठीक हैं”, बढ़ई ने कहा।
बड़े भाई ने बढ़ई को सारा सामान लाकर दे दिया और खुद शहर चला गया, शाम को लौटा तो बढ़ई का काम देखकर भौंचक्का रह गया, बाड़ की जगह वहा एक पुल था जो खाई को एक तरफ से दूसरी तरफ जोड़ता था. इससे पहले की बढ़ई कुछ कहता, उसका छोटा भाई आ गया।
छोटा भाई बोला “तुम कितने दरियादिल हो , मेरे इतने भला बुरा कहने के बाद भी तुमने हमारे बीच ये पुल बनाया", कहते कहते उसकी आँखे भर आईं और दोनों एक दूसरे के गले लग कर रोने लगे. जब दोनों भाई सम्भले तो देखा कि बढ़ई जा रहा है।
"रुको! मेरे पास तुम्हारे लिए और भी कई काम हैं", बड़ा भाई बोला।
"मुझे रुकना अच्छा लगता ,पर मुझे ऐसे कई पुल और बनाने हैं", बढ़ई मुस्कुराकर बोला और अपनी राह को चल दिया.
दिल से मुस्कुराने के लिए जीवन में पुल की जरुरत होती हैं खाई की नहीं। छोटी छोटी बातों पर अपनों से न रूठें।
"दीपावली आ रही है घरेलू रिश्तों के साथ साथ सभी दोस्ती के रिश्तों पर जमी धूल भी साफ कर लेना, खुशियाँ चार गुनी हो जाएंगी"
आने वाली दीपावली आप सभी के लिए खुशियाँ ले कर आए.

Wednesday, October 8, 2014

कहानी - एक समझौता - कल्पनाओं से परे


हिमांशु पुष्करणा को धन्यवाद सहित
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वो एक खेल का मैदान था।

8 लड़के दौड़ने के लिए ट्रैक पर एकदम तैयार खड़े थे।

आवाज़ गूंजी - "रेडी! स्टेडी! गो।"

पिस्टल की आवाज़ के साथ ही सब लडकों ने दौड़ना शुरू कर दिया।

अभी वो सब 10 से 15 कदम ही दौड़ पाए थे कि उनमें से 1 लड़का फिसला और गिर गया।

दर्द के कारण वो रोने लगा।

जब दूसरे 7 लडकों ने उसकी आवाज़ सुनी तो वे दौड़ते दौड़ते "रुक गये"।

एक क्षण के लिए वो रुके, इसके बाद वे मुड़े और उस गिर गए लड़के की ओर दौड़ पड़े।

उन सभी सातों लड़कों ने मिलकर उसे उठा लिया और उसे उठाये उठाये ही वो सब दौड़ की अंतिम रेखा तक पहुँचे।

लोग सन्न हो गये।

बहुत सी आँखों में आंसू थे।

ये घटना 2 वर्ष पहले पूना में घटी थी।

नैशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ़ मेंटल हैल्थ की ओर से इस दौड़ का आयोजन किया गया था।

सभी प्रतिभागी मानसिक तौर पर कमजोर थे।

उन्होंने क्या सिखाया?
टीमवर्क,
इंसानियत,
खेल की भावना,
प्रेम,
ध्यान,
और
समानता।

हम लोग निश्चित तौर पर ऐसा कभी नहीं कर सकते,

क्योंकि ........

हम दिमाग रखते हैं .......
हममें अहम् है ........
हममें दिखावा है .......

के डी परिवार की ओर से निवेदन - यदि इस घटना ने आपके दिल को छुआ हो, आपको जरा भी प्रभावित किया हो तो इसे अपने मित्रों के साथ जरुर शेअर करें।

Saturday, October 4, 2014

स्वच्छ भारत : एक अभियान


प्रधानमन्त्री माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा 3 अक्तूबर 2014 को स्वच्छ भारत अभियान का शुभारम्भ किया गया।
श्री मोदी जी के अनुसार ये अभियान राजनीती से नहीं बल्कि देश भक्ति से प्रेरित है।
प्रधानमन्त्री महोदय ने देश को साफ़ रखने में किसी भी तरह के पूर्व में किये कार्यों की प्रशंसा की और देश के प्रत्येक नागरिक को पूरे देश को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित किया।
मैं श्री मोदी जी के इस कार्य को देश भक्ति के साथ साथ मानवता से भी प्रेरित मानता हूँ।
माननीय मोदी जी ने कुछ सूत्र दिए हैं : अगला चित्र देखें


इन सूत्रों को पढ़ने के लिए दैनिक जागरण देखें।
पर क्या ये 10 सूत्रीय कार्यक्रम सफल हो पायेगा? जैसा पंजाब की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रो. लक्ष्मीकांत चावला जी का कहना है अगर वैसा हुआ तो सच में ये कार्यक्रम असफल हो जाएगा।


प्रो. लक्ष्मीकांत चावला जी का कहना है कि ये अभियान केवल फोटो खिंचवाने तक ही सीमित ना रह जाए। बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ वर्ष में एक दिन भी कोई सफाईकर्मी नहीं पहुँचता। ऐसे बहुत से स्थान हैं जहाँ चूहे और मच्छर भरे पड़े हैं, ऐसे स्थानों की भी सुध ली जाये।
एक सूत्र के डी परिवार की ओर से : हमें अपनी आदतों और व्यवहार में बहुत बड़ा परिवर्तन लाना होगा। साफ़ सफाई से सम्बन्धित आदतों में हमें बदलाव करना होगा।
हम फलों, मूंगफलियों के छिलके, टॉफ़ी - चिप्स - चाकलेट आदि के खाली पैकेट और खाली बोतलें हम जहाँ तहां फैंकने के आदी हैं। हमें ये आदत बदलनी होगी।
क्या हम अपने घर में भी ऐसा ही करते हैं?
क्या हम अपने घर में केला या मूंगफलियां खा कर छिलके ऐसे ही इधर उधर फेंकते हैं? अगर नहीं तो घर से बाहर होने पर हम ऐसा क्यों करते हैं? अगर हम अपने घर में कूड़ा फैलाना पसंद नहीं करते तो घर से बाहर कूड़ा क्यों फैलाते हैं?
प्रधानमन्त्री जी के इस "स्वच्छता अभियान" को हमारे और आपके सहयोग के बिना पूरा नहीं किया जा सकता।
मेरे ख्याल से श्री मोदी जी के इस कार्य को सभी ने पसंद किया होगा। पर क्या सभी आज से ही गंदगी फैलाना बंद कर देंगे? क्या ये उम्मीद की जा सकती है कि कल सुबह जब सडकों पर जायेंगे तो सडकें साफ़ मिलेंगी? क्या हम घर से बाहर भी घर की तरह ही साफ़ सफाई रखने में सहयोग देंगे?
अगर हाँ तो मेरा यकीन मानिए हम अपने देश को भी उतना ही खुबसूरत बना लेंगे जितने हम सब के घर हैं।
हममें से जो लोग बाहर देश जा के आते हैं वो बाहर के देशों की सफाई और सुन्दरता के गुण गाते हैं। आओ मिलकर अपने देश को इतना स्वच्छ और सुंदर बनायें कि बाहर देश से आये लोग हमारे गुण गायें।
इसके अलावा जिन क्षेत्रों में लोग गंदगी में रहते हैं उन स्थानों पर बार-2 जा कर उन लोगों को गंदगी को साफ करने और गंदगी ना फ़ैलाने के लिए प्रेरित किया जाये। उन्हें समझाया जाये कि अगर उनके क्षेत्र में सफाईकर्मी नहीं आता तो वे खुद सफाई करें। क्योंकि सफाईकर्मी के ना आने से नुकसान सफाईकर्मी का नहीं बल्कि लोगों का ही होता है।
के डी परिवार पिछले 8 वर्षों से झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ रहने की प्रेरणा दे रहा है। आप अपने क्षेत्र में ऐसे स्थानों की तलाश करें और वहां रहने वाले लोगों को सफाई हेतू प्रेरित करें।
आओ संकल्प लें, जैसा कि "तारक मेहता का उल्टा चश्मा" की टीम ने कहा - "आज से ना तो खुद गन्दगी फैलायेंगे और ना ही किसी को फ़ैलाने देंगे"।
जय हिन्द! जय भारत!
शुभेच्छाओं के साथ के डी परिवार
(चित्र साभार दैनिक सवेरा)