Friday, December 19, 2014
माता-पिता पर एक बेहतरीन रचना - द्वारा - परम पूज्य राष्ट्र संत श्री मोरारी बापू जी
Friday, November 7, 2014
क्या है सफलता - एक चर्चा
लेखिका - नीना दयाल
(नीना दयाल एक लाइसेंस्ड लाइफ़ सक्सेस सलाहकार, बिजनेस और पर्सनल कोच, कैपेबिलिटी बिल्डिंग एक्सपर्ट, मेंटल रेसिलिएंस* स्पेशलिस्ट, मैनेजमेंट कन्सल्टेंट और लेखिका हैं। आप सीक्रेट पुस्तक व फिल्म में दिखाये गये और मानवीय क्षमता को बढ़ाने में माहिर श्री बॉब प्रॉक्टर से प्रशिक्षित हैं।
आप लम्बे समय से बहुत सी राष्ट्रीय व अन्तर्राष्ट्रीय कम्पनियों के लिये प्रशिक्षण दे रही हैं।
नीना जी की कम्पनी सक्सेस सिनर्जी इंटरप्राइजेज कॉर्पोरेट और पब्लिक श्रोताओं के लिये हर वर्ष बहुत से इवेंट्स करती है।
नीना जी के डी परिवार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और के डी परिवार में अपने ज्ञान व अनुभव को साधारण जन के साथ शेयर कर रही हैं। इस लेख को भेजने के लिए के डी परिवार नीना जी का हार्दिक धन्यवाद करता है।
इस लेख के माध्यम से नीना जी आपको आमंत्रित कर रही हैं, सफलता के आपके मानक आदर्शों पर चर्चा करने के लिये। इस चर्चा में शामिल हों और अपनी सफलता की दिशा में ठोस कदमों के साथ आगे बढ़ें।)
क्या है सफलता - एक चर्चा
अपने मान्य आदर्शों की ओर प्रगतिशील रहना ही "सफलता" है।
अर्ल नाईटएंगल
आइये इस पर चर्चा करें -
सफलता की व्याख्याओं में ऊपर दी गई व्याख्या सबसे अधिक संतुष्टि देने वाली मानी जाती है, जो प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होती है। अर्ल ने 1959 में 17 वर्षों के अपने गहन शोध के बाद यह व्याख्या दी। पूरी दुनिया में बहुत से माहिर लोग आज भी सफलता का विवरण देते समय इस व्याख्या का उपयोग करते हैं।
साधारण तर्क यही कहता है कि किसी चीज़ के होने से पहले आपका उसको जानना जरूरी है।
इसलिये मान्य आदर्श की ओर प्रगतिशील होने से पहले आपको ये जानना जरूरी है कि "आपका मान्य आदर्श आखिर' है क्या?"
आप सभी मित्रों से निवेदन है कि कृपया इस चर्चा में भाग लें और बतायें कि आपका सफलता का मान्य आदर्श क्या है?
अनुवादक - विपिन कुमार शर्मा
Thursday, November 6, 2014
सफलता का ज्ञान
Sunday, October 19, 2014
के डी परिवार का "सफलता का ज्ञान-अनुसन्धान यज्ञ"
Thursday, October 16, 2014
एक प्रेरणास्पद कहानी : पुल
Wednesday, October 8, 2014
कहानी - एक समझौता - कल्पनाओं से परे
Saturday, October 4, 2014
स्वच्छ भारत : एक अभियान
इन सूत्रों को पढ़ने के लिए दैनिक जागरण देखें। पर क्या ये 10 सूत्रीय कार्यक्रम सफल हो पायेगा? जैसा पंजाब की पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रो. लक्ष्मीकांत चावला जी का कहना है अगर वैसा हुआ तो सच में ये कार्यक्रम असफल हो जाएगा।
प्रो. लक्ष्मीकांत चावला जी का कहना है कि ये अभियान केवल फोटो खिंचवाने तक ही सीमित ना रह जाए। बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं जहाँ वर्ष में एक दिन भी कोई सफाईकर्मी नहीं पहुँचता। ऐसे बहुत से स्थान हैं जहाँ चूहे और मच्छर भरे पड़े हैं, ऐसे स्थानों की भी सुध ली जाये। एक सूत्र के डी परिवार की ओर से : हमें अपनी आदतों और व्यवहार में बहुत बड़ा परिवर्तन लाना होगा। साफ़ सफाई से सम्बन्धित आदतों में हमें बदलाव करना होगा। हम फलों, मूंगफलियों के छिलके, टॉफ़ी - चिप्स - चाकलेट आदि के खाली पैकेट और खाली बोतलें हम जहाँ तहां फैंकने के आदी हैं। हमें ये आदत बदलनी होगी। क्या हम अपने घर में भी ऐसा ही करते हैं? क्या हम अपने घर में केला या मूंगफलियां खा कर छिलके ऐसे ही इधर उधर फेंकते हैं? अगर नहीं तो घर से बाहर होने पर हम ऐसा क्यों करते हैं? अगर हम अपने घर में कूड़ा फैलाना पसंद नहीं करते तो घर से बाहर कूड़ा क्यों फैलाते हैं? प्रधानमन्त्री जी के इस "स्वच्छता अभियान" को हमारे और आपके सहयोग के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। मेरे ख्याल से श्री मोदी जी के इस कार्य को सभी ने पसंद किया होगा। पर क्या सभी आज से ही गंदगी फैलाना बंद कर देंगे? क्या ये उम्मीद की जा सकती है कि कल सुबह जब सडकों पर जायेंगे तो सडकें साफ़ मिलेंगी? क्या हम घर से बाहर भी घर की तरह ही साफ़ सफाई रखने में सहयोग देंगे? अगर हाँ तो मेरा यकीन मानिए हम अपने देश को भी उतना ही खुबसूरत बना लेंगे जितने हम सब के घर हैं। हममें से जो लोग बाहर देश जा के आते हैं वो बाहर के देशों की सफाई और सुन्दरता के गुण गाते हैं। आओ मिलकर अपने देश को इतना स्वच्छ और सुंदर बनायें कि बाहर देश से आये लोग हमारे गुण गायें। इसके अलावा जिन क्षेत्रों में लोग गंदगी में रहते हैं उन स्थानों पर बार-2 जा कर उन लोगों को गंदगी को साफ करने और गंदगी ना फ़ैलाने के लिए प्रेरित किया जाये। उन्हें समझाया जाये कि अगर उनके क्षेत्र में सफाईकर्मी नहीं आता तो वे खुद सफाई करें। क्योंकि सफाईकर्मी के ना आने से नुकसान सफाईकर्मी का नहीं बल्कि लोगों का ही होता है। के डी परिवार पिछले 8 वर्षों से झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले लोगों को स्वच्छ रहने की प्रेरणा दे रहा है। आप अपने क्षेत्र में ऐसे स्थानों की तलाश करें और वहां रहने वाले लोगों को सफाई हेतू प्रेरित करें। आओ संकल्प लें, जैसा कि "तारक मेहता का उल्टा चश्मा" की टीम ने कहा - "आज से ना तो खुद गन्दगी फैलायेंगे और ना ही किसी को फ़ैलाने देंगे"। जय हिन्द! जय भारत! शुभेच्छाओं के साथ के डी परिवार (चित्र साभार दैनिक सवेरा)
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